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जागरूकता के दावे खोखले, अनूपपुर में यातायात व्यवस्था बदहाल ओवरलोड वाहन, गांजा तस्करी और आपात सेवाओं की नाकामी ने खोली सिस्टम की पोल

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अनूपपुर

जिले में यातायात पुलिस द्वारा सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता अभियानों के बड़े-बड़े दावों के बीच ज़मीनी हकीकत इससे ठीक उलट तस्वीर पेश कर रही है स्कूलों और ब्लैक स्पॉट क्षेत्रों में बच्चों को यातायात नियमों का पाठ पढ़ाया जा रहा है, लेकिन वास्तविकता यह है कि जिले की सड़कें अव्यवस्था, अवैध गतिविधियों और लचर निगरानी का शिकार बनी हुई हैं

 

स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि नए यातायात प्रभारी विनोद दुबे को हाईवे चौकी प्रभारी फूनगा का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने के बाद से यातायात नियंत्रण पूरी तरह कमजोर हो गया है। कहा जा रहा है कि एक ही अधिकारी के पास दो अहम जिम्मेदारियां होने से निगरानी प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर सड़क सुरक्षा पर पड़ रहा है।

 

हाईवे बना ओवरलोड वाहनों का अड्डा

 

जिले के राष्ट्रीय एवं राज्यीय राजमार्गों पर ओवरलोड वाहनों की खुलेआम आवाजाही जारी है। नियमों की अनदेखी करते हुए भारी वाहन बिना किसी रोक-टोक के दौड़ रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले जहां समय-समय पर जांच और कार्रवाई होती थी, अब वहां केवल औपचारिकता रह गई है।

 

रामपुर खड़ा से गांजा तस्करी के आरोप

 

स्थिति यहीं तक सीमित नहीं है। आरोप हैं कि रामपुर खड़ा क्षेत्र से होकर गांजा तस्करी का नेटवर्क सक्रिय है। इसी का ज्वलंत उदाहरण हाल ही में जैतहरी में सामने आया, जहां एसटीएफ टीम ने लगभग 6 क्विंटल गांजा जब्त किया। यह घटना जिले में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी के बढ़ते खतरे की ओर इशारा करती है और यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर इतनी बड़ी खेप हाईवे से कैसे गुजर गई।

 

अमरकंटक की घटना ने झकझोरा

 

यातायात और आपात व्यवस्थाओं की बदहाली का एक और दर्दनाक उदाहरण अमरकंटक में देखने को मिला। जानकारी के अनुसार, एक युवक डिवाइडर से टकराने के बाद गंभीर रूप से घायल हो गया और घंटों सड़क पर तड़पता रहा। हैरानी की बात यह रही कि न तो 108 एंबुलेंस सेवा समय पर पहुंची और न ही 112 आपात सेवा। समय पर उपचार न मिलने के कारण युवक की मौत हो गई। इस घटना ने पूरे जिले में आक्रोश और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है

 

जागरूकता बनाम ज़मीनी कार्रवाई

 

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब निगरानी कमजोर हो, नियमों का सख्ती से पालन न कराया जाए और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई न हो, तब जागरूकता अभियान केवल कागजी साबित होते हैं। लोगों की मांग है कि यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए हाईवे पर सख्त चेकिंग, ओवरलोडिंग पर तत्काल कार्रवाई, तस्करी नेटवर्क पर कठोर प्रहार और आपात सेवाओं की जवाबदेही तय की जाए

 

जिले में सड़क सुरक्षा अभियानों की कमान पुलिस अधीक्षक मोती उर रहमान के निर्देशन में होने की बात कही जाती है, लेकिन मौजूदा हालात यह संकेत दे रहे हैं कि नीतियों और अमल के बीच बड़ा अंतर है। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इन गंभीर आरोपों और घटनाओं के बाद क्या ठोस कदम उठाता है, या फिर यातायात जागरूकता के दावे केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएंगे।

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