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अनूपपुर में धान उपार्जन घोटाले की परतें खुलीं महिला स्व-सहायता समूहों की आड़ में करोड़ों का खेल, अफसर–नेताओं की मिलीभगत उजागर 

By Santosh Chaurasiya

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अनूपपुर।

जिले में धान उपार्जन वर्ष 2024–25 के दौरान सामने आए महाघोटाले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महिला स्व-सहायता समूहों के नाम पर करोड़ों रुपये के लेन–देन, फर्जी खरीदी और गलत खातों में भुगतान के मामले उजागर हुए हैं। आरोप है कि धान खरीदी की आड़ में नियमों को ताक पर रखकर संगठित भ्रष्टाचार किया गया।

 

प्राप्त जानकारी के अनुसार बीते वर्ष विभिन्न महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से की गई धान खरीदी में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आईं। भुगतान ऐसे खातों में किया गया, जिनका धान खरीदी से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था। जांच में यह भी सामने आया कि भाजपा महिला मंडल की पूर्व अध्यक्ष के खाते में 7.46 लाख रुपये का ट्रांसफर किया गया, जिससे मामला और अधिक संदिग्ध हो गया है।

 

सूत्रों का कहना है कि उपार्जन प्रक्रिया में शामिल कुछ अधिकारियों और समूह पदाधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। धान खरीदी केंद्रों पर वास्तविक किसानों की बजाय चयनित समूहों को लाभ पहुंचाया गया। नियमों के अनुसार जिस सहायता समूह को खरीदी का दायित्व दिया गया था, उसके स्थान पर अन्य समूहों से काम कराया गया, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ।

 

इस पूरे मामले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जिला खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो ऐसे घोटाले आगे भी होते रहेंगे।

 

अब देखना यह है कि करोड़ों के इस धान उपार्जन घोटाले में केवल निचले स्तर के लोगों पर कार्रवाई होती है या फिर जिम्मेदार अधिकारियों और प्रभावशाली चेहरों तक कानून का शिकंजा पहुंचता है

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