एमसीबी। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन की तीन दिवसीय हड़ताल के दौरान एमसीबी जिले में प्रशासन और कर्मचारियों के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। शांतिपूर्ण आंदोलन के बीच जिला प्रशासन द्वारा की गई कार्यवाही ने विवाद को और भड़का दिया है। इसी विरोध में पूर्व विधायक एवं छत्तीसगढ़ ट्रेड यूनियन काउंसिल के प्रांताध्यक्ष गुलाब कमरों धरना स्थल पर पहुंचे और आंदोलनरत कर्मचारियों के साथ एकजुटता दिखाई।
धरना स्थल पर पहुंचते ही गुलाब कमरों ने प्रशासन की कार्यवाही को अन्यायपूर्ण और अलोकतांत्रिक बताते हुए कहा कि कर्मचारी अपने संवैधानिक अधिकारों के तहत शांतिपूर्ण हड़ताल कर रहे थे। इसके बावजूद पुलिसिया कार्यवाही और निलंबन जैसे कदम लोकतांत्रिक व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगाते हैं। हड़ताल के दौरान शिक्षक गोपाल सिंह, सफाई कर्मचारी सुरेन्द्र प्रसाद और राजस्व निरीक्षक संजय पाण्डेय को बिना पूर्व सूचना और बिना पक्ष रखने का अवसर दिये निलंबित किये जाने से कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि इस तरह की कार्यवाही से भय का वातावरण बनाकर आंदोलन को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है।
गुलाब कमरों ने कहा की प्रदेश के अन्य जिलों में हड़ताल शांतिपूर्ण ढंग से चल रही थी लेकिन एमसीबी जिले में प्रशासन की सख्ती ने स्थिति को तनावपूर्ण बना दिया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि निलंबन आदेश तत्काल वापस नहीं लिये गये तो आंदोलन को और अधिक व्यापक किया जायेगा।
धरना स्थल पर उनके साथ अधिवक्ता राम नरेश पटेल, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष राजकुमार केसरवानी, युवा कांग्रेस जिला अध्यक्ष हाफिज मेमन, आदिवासी कांग्रेस अध्यक्ष अमोल सिंह मरावी सहित अनेक पार्षदगण अजय जायसवाल, स्वप्निल सिन्हा, मुकेश अग्रवाल, इमरान खान, आनंद राय, सुनील राय, अज्जू रवि, अमर सिंह, विकास श्रीवास्तव, संदीप द्विवेदी तथा बड़ी संख्या में कांग्रेसजन और कर्मचारी नेता मौजूद रहे।
धरना स्थल पर उपस्थित सभी नेताओं ने एक स्वर में निलंबन आदेश को तत्काल वापस लेने और कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि यदि प्रशासन ने अपना रवैया नहीं बदला तो यह आंदोलन जिले की सीमा से निकलकर प्रदेश स्तर पर और तेज रूप ले सकता है।


















