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शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय दतिया में वित्तीय अनियमितता, अधिष्ठाता डॉ दीपक सिंह मरावी क़ो भोपाल से नोटिस जारी संवाददाता भरत रावत 

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शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय दतिया में वित्तीय अनियमितता, अधिष्ठाता डॉ दीपक सिंह मरावी क़ो भोपाल से नोटिस जारी

संवाददाता भरत रावत 

 

दतिया। शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय दतिया (म.प्र.) में सोलर पैनल की खरीदी और भुगतान प्रक्रिया में गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। संचालनालय लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मध्यप्रदेश द्वारा जारी नोटिस के अनुसार, अधिष्ठाता द्वारा सोलर पैनल के भुगतान के लिए बिल ट्रेजरी में पेश किये थे , जिसका संज्ञान ट्रेजरी अधिकारी द्वारा लिया जाकर संचनालय लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मध्यप्रदेश से अभिमत माँगा गया था , जिसके आधार पर आयुक्त श्री तरुण राठी ने नोटिस देकर 7 दिनों में जबाब माँगा है | पत्र के अनुसार भुगतान , सम्बंधित मद से ना किया जाकर किसी अन्य मद से करने का प्रयास किया गया तथा भुगतान पूर्व , शासन से पूर्व अनुमति नहीं ली गयी अतः यहाँ शासन के वित्तीय नियमों का उल्लंघन हुआ। नोटिस में खरीदी और भुगतान संबंधी अनुचित प्रक्रिया के स्पष्ट प्रमाण दर्ज हैं तथा अधिष्ठाता को 7 दिन में स्पष्टीकरण देने को कहा गया है।

 

पत्र में क्या है

क्लीन टेक सोलर एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड से सोलर पैनल ख़रीद कर तयाशय के

दैयक-019-2210-05-105-0101-9080-22-005 से भुगतान हेतु कोषालय को प्रस्तुत किए जाने पर कोषालय द्वारा दी गई आपत्ति के आधार पर संचनालय से मार्गदर्शन चाहा गया है| लेखाओं के वर्गीकरण के तहत 22-005 मद जल एवं बिजली प्रभार हेतु प्राधिकृत मद है अतः यह स्पष्ट करें कि आपके द्वारा सोलर पैनल के उपार्जन के पूर्व वित्तीय औचित्य के मानक सिद्धांत नियम -8 का अनुपालन ना किए जाने के साथ साथ वित्तीय शक्ति पुस्तिका भाग -1 के तहत सक्षम स्वीकृति प्राप्त ना की जाकर तदाशय के देयक उचित लेखा शीर्ष से प्रस्तुत ना किए जाकर , व्यपवर्तन की स्थिति निर्मित की गई है,उपरोक्त के अतिरिक्त संचनालय द्वारा 2210-05-105-0101-7502-22-013 में राशि रुपए २० लाख का आवंटन जारी किया गया है आवंटन के विरुद्ध व्यय की समीक्षा में आपके द्वारा राशि रुपए ६.०७ लाख का भुगतान एवं राशि रुपए ४.९० लाख के देयक कोषालय को प्रस्तुत किए गए हैं ,उक्त देयक किन उद्देश्यों की अभिपूर्ति एवं किस स्तर पर सक्षम स्वीकृति उपरांत प्रेषित किए गए हैं|

आपका कृत्य मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम १९६५ के नियम १,२ एवम ३ के विरुद्ध होकर कदाचरण की श्रेणी में आता है

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