पुष्पराजगढ़/अनूपपुर
किसान उतरे सड़कों पर,अपर नर्मदा बांध परियोजना के विरोध में
पुष्पराजगढ़ में हजारो की संख्या में किसानों ने सड़कों पर संभाला मोर्चा,बसनिहा तिराहे से लेकर राजेन्द्र ग्राम के मार्केट तक निकाली रैली,हाथों में लिए तपती जिस पर लिखा था और वो तपती संदेश दे रहे थे,कि किसानो को बांध नहीं चाहिए आक्रोशित किसानों ने सड़कों पर लगाए नारे ,नहीं चाहिए नहीं चाहिए नर्मदा बांध परियोजना,यह विरोध प्रदर्शन किसान संघर्ष मोर्चा के बैनर के नीचे आयोजित किया गया जिसमें महिलाएं, पुरुष तथा युवा शामिल थे , इस अपर नर्मदा बांध परियोजना के बनने से चौदह हजारो परिवारों को विस्थापित होने का खतरा उनके सर पर मंडरा रहा है,पहले भी किसानों ने ज्ञापन के माध्यम से जिला मुख्यालय पर अपनी बात रखी फिर दमेहडी पंचायत में महापंचायत बुलाई गई जिसमें पुष्पराजगढ़ एसडीएम और अपर नर्मदा बांध परियोजना के अधिकारी अभियंता ने लिखित में दिया था कि बिना ग्रामीणों के सहमति से कार्य चालू नहीं किया जायेगा लेकिन शासन प्रशासन ने कार्य को फिर से चालू कर दिया जिससे किसानों में भारी रोष देखने को मिला अपर नर्मदा बांध परियोजना के संबध में
*क्या चाहते हैं किसान*
किसान चाहते हैं कि बांध न बनाया जाए क्योंकि बांध बनने से उनसे उनकी जमीनें छिन जायेगी और उनके हाथों जीवन यापन करने वाली कृषि योग्य भूमि उनसे छिन जाएगी ,और भूमि डूब में जाने से उनके पास कुछ नहीं रहेगा जिससे जीने का सहारा छिन जाएगा और वह भूखे मरने के कगार पर पहुंच जायेंगे, किसानों ने यह भी बताया कि हमारी जमीनों में सिंचाई की भी जरूरत नहीं पड़ती है,हमारी जमीनों से धान , गेहूं, सोयाबीन की फसलें हमें प्राप्त होती है जिससे हम अपना और अपने परिवार का भरण पोषण करते आ रहे हैं वो भी पीढ़ी दर पीढ़ी लेकिन अपर नर्मदा बांध परियोजना की वजह से हम कहीं के भी नहीं रह जाएंगे ,हमें बांध नहीं चाहिए न ही मुआवजा चाहिए,हमें बस हमारी खेती योग्य भूमि चाहिए हमें विस्थापित नहीं होना चाहते हैं,हम लोग कहां जाएंगे,
सबसे बड़ी चुनौती किसान की
अपर नर्मदा बांध परियोजना बनने के बाद विस्थापित किसान परिवार कहा जाएंगे कैसे करेंगे अपने और अपने परिवार का भरण पोषण क्योंकि जंगल काटे जा रहे हैं,चारों तरफ सरकारें ग्रामीणों की जमीनें अधिग्रहण कर कंपनियों को दे रही है अब ऐसे सवाल लाजिमी है कि जब हर जगह उद्योग होगा तो विस्थापित परिवार कहा जाएंगे, अनूपपुर जिले में सरकार कृषि योग्य भूमियों पर उद्योग स्थापित करवा रही है जिससे किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती दिख रही है कि वह क्या करे , स्थानीय निवासियो को उद्योगपति न रोजगार देने के मूड पर है और न उचित मुआवजा,एक तरफ सरकारें ग्रामीणों को खेती के लिए प्रोत्साहित करती है तो वहीं दूसरी तरफ उनसे उनकी जमीनें अधिग्रहण कर उद्योगपतियों को सौंप रही है,
किसानों ने सरकारों को आंदोलन के माध्यम से दें दी है चेतावनी,कि हमें नहीं चाहिए आपका बांध परियोजना और नहीं चाहिए आपका विकास माडल हमें बस हमारी जमीन चाहिए नहीं तो आंदोलन होगा जिसमें आर पार की होगी लड़ाई ,करेंगे सड़कों पर चक्का जाम,हमने कितने ही बार सरकारो तक रखी अपनी बात प्रशासन के माध्यम से लेकिन सरकार द्वारा खुद के बनाए ग्राम सभा कानून और पेशा एक्ट का खुद ही अनुपालन नहीं कर रही है,


















