एमसीबी। नागपुर हाल्ट चिरमिरी रेल विस्तार परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण को लेकर प्रभावित किसानों का आक्रोश लगातार तेज होता जा रहा है। परियोजना से प्रभावित ग्राम बंजी और चिरईपानी के किसानों ने पूर्व विधायक गुलाब कमरो से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा और मुआवज़ा निर्धारण में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाये। किसानों का कहना है कि उनकी भूमि का मुआवज़ा वर्तमान बाजार दर से काफी कम तय किया गया है जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों ने मांग की है कि उन्हें चार गुना मुआवज़ा, सरकारी गाइडलाइन दरों में संशोधन, उचित पुनर्वास और स्थायी रोजगार उपलब्ध कराया जाये।
*ग्राम सभा में भ्रामक आश्वासन का आरोप*
प्रभावित किसानों ने आरोप लगाया कि ग्राम सभा के दौरान प्रशासन द्वारा भ्रामक जानकारी देकर सहमति ली गई। किसानों का कहना है कि उन्हें ना तो परियोजना के वास्तविक दुष्परिणामों की जानकारी दी गई और ना ही मुआवज़ा निर्धारण की स्पष्ट प्रक्रिया बताई गई। इससे पूरे भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
*एक जैसे गांव, अलग-अलग दरें, किसानों में नाराज़गी*
ज्ञापन में किसानों ने उल्लेख किया कि सरभोका, सरौला, सेंधा, नागपुर और सिरियाखोह जैसे आसपास के गांवों की भूमि दरें काफी अधिक निर्धारित की गई हैं जबकि बंजी और चिरईपानी की भौगोलिक और विकासात्मक स्थिति इन गांवों के समान या उनसे बेहतर है। इसके बावजूद इन गांवों की दरें कम तय करना किसानों के साथ खुला अन्याय है। किसानों का यह भी कहना है कि बंजी और चिरईपानी की वर्तमान सरकारी गाइडलाइन दरें पड़ोसी विकसित गांवों की तुलना में काफी कम हैं। पुरानी और अव्यावहारिक दरों के आधार पर मुआवज़ा तय किया जाना उन्हें किसी भी हालत में स्वीकार नहीं है।
*पहले भी उठ चुका है मामला*
गौरतलब है कि इससे पहले ग्राम पंचायत खैरबना के 23 किसानों ने भी भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवज़ा नहीं मिलने को लेकर पूर्व विधायक गुलाब कमरो को आवेदन सौंपा था। तब भी किसानों ने मुआवज़ा निर्धारण में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया था।
*पूर्व विधायक गुलाब कमरो का भरोसा*
किसानों से ज्ञापन प्राप्त करने के बाद पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने कहा कि किसानों की मांगें पूरी तरह जायज हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे किसानों के साथ खड़े हैं और उनकी समस्याओं को शासन और प्रशासन के समक्ष मजबूती से उठाएंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसानों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होने दिया जायेगा।
फिलहाल नागपुर हाल्ट–चिरमिरी रेल विस्तार परियोजना में मुआवज़े को लेकर उठे सवाल प्रशासन के लिये गंभीर चुनौती बनते नजर आ रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और व्यापक आंदोलन का रूप ले सकता है।


















