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मां नर्मदा परिक्रमा में वफादार जानवर भी कर पा रहा परिक्रमा ।

By Santosh Chaurasiya

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अमरकंटक – मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली / पवित्र नगरी अमरकंटक में सैकड़ों , हजारों भक्त परिक्रमा के लिए आते जाते हैं । किसी ने नर्मदा जी के उत्तर तट से तो किसी ने दक्षिण तट से परिक्रमा प्रारंभ करता है । कोई व्यक्ति अमरकंटक उद्गम क्षेत्र से लेकर खंभात की खाड़ी तक में किसी भी स्थान से परिक्रमा की शुरुआत करता है और उसी स्थान पर पहुंच कर पूर्ण करना पड़ता है । इसी तरह मां नर्मदा की परिक्रमा करते हुए मां नर्मदा जी की कृपा पात्र बन उनका मां का आशीष प्राप्त करते है ।

 

इसी क्रम में एक संत रामचंद्र दास महात्यागी बागड़िया धार जिला द्वारा अमरकंटक से परिक्रमा प्रारंभ की गई थी जो अभी हाल ही में पूर्ण हुई । परिक्रमा पूर्ण करने के उपरांत उन्होंने माई की बगिया तथा नर्मदा मंदिर में पूजा–अर्चना कर अपनी मनोकामनाए माई को अर्पित की गई साथ ही यह आशीर्वाद मांगा गया कि माई अपने सभी भक्तों पर मां नर्मदा खूब आशीर्वाद प्रदान करे और माई सब पर कृपा बनाए रखे ।

हमारे साथ सायकिल पर सवार होकर प्रभु श्री रामचंद्र जी भी हम सब के साथ मां नर्मदा जी की परिक्रमा कर रहे है । इनका और मां भगवती के सहारे परिक्रमा पूर्ण हुई ।

 

खास और विशेष बात यह रही कि संतो के संग और परिक्रमा वासियों के साथ एक घोड़ा भी उन सबके साथ चल रहा है जो उसने भी इन सब के साथ पूरी नर्मदा परिक्रमा साथ कर पा रहा है । यद्यपि सब की यात्रा पैदल ही की जा रही है । घोड़ा केवल साथ चल रहा और अपने मुखिया का सामान पीठ पर लादकर परंपरा और आस्था के साथ वह भी साथ चल रहा है—सवारी के रूप में उसका उपयोग नहीं किया जा रहा , यह बड़ी बात है । परिक्रमा वासी संत ने बताया कि घोड़ा और हम धार जिले से है परिक्रमा प्रारंभ की गई थी और रास्ते में चलते चलते संत महात्यागी जी से भेंट हुई तो साथ चल रहे है । उनकी परिक्रमा अमरकंटक में पूर्ण हो जावेगी ।

 

यह दृश्य एक संदेश देता है कि केवल मनुष्य ही नहीं बल्कि वफादार पशु भी संत संग पाकर भवसागर पार उतर सकता है , यह देख कुछ ऐसा ही महसूस हो रहा है । परिक्रमा वासियों के साथ घोड़ा भी पुण्य का कार्य मां नर्मदा की परिक्रमा में सहभागी बनकर स्वयं को धन्य बना रहा है । संत और उनके साथी अमरकंटक के प्रसिद्ध स्थल गणेश धूना आश्रम में रात्रि विश्राम करने की बात कही गई है ।

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