छत्तीसगढ़ के मरवाही वन क्षेत्र में हाथियों ने मचाई तबाही, स्थानीय लोग दहशत में
लोक किरन -शाबिर अली खान
गौरेला पेंड्रा मरवाही:चार जंगली हाथियों के झुंड ने छत्तीसगढ़ के मरवाही वनमंडल में उत्पात मचाया है. हाथियों ने कई ग्रामीणों के घरों को तबाह कर दिया है. जिससे स्थानीय ग्रामीणों में दहशत और भय का माहौल है।
मरवाही में हाथियों का उत्पात:
स्थानीय लोगों ने मरवाही बीट गार्डों पर पहले से चेतावनी नहीं देने का आरोप लगाया. प्रभावित ग्रामीण धनेश प्रजापति ने बताया “रविवार रात 8:30 बजे हाथी आए और घर को तहस-नहस कर दिया. बरसात में हम कहां जाएंगे? मरवाही के बीट गार्ड कुछ नहीं कर रहे हैं. वे बस गाड़ी में इधर-उधर घूम रहे हैं.”
स्थानीय निवासी सुभद्रा प्रजापति ने कहा, “एक हाथी ने 2-3 घरों को नुकसान पहुंचाया. घर में रखा अनाज भी बर्बाद कर दिया. खाने-पीने के लिए कुछ भी नहीं है. हम इतने डरे हुए हैं कि रात को भी जाग रहे हैं. ”
क्षतिग्रस्त घरों का आकलन कर रहा वन विभाग:
बताया जा रहा है कि चार हाथी झुंड से अलग हो गए है. मरवाही वन रेंजर रमेश कुमार ने कहा, “पिछले सात दिनों में, हाथियों ने 15-16 घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया और फसलों को भी नुकसान पहुंचाया. क्षतिग्रस्त घरों का आकलन अभी भी जारी है, और एक टीम हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख रही है. वे भोजन की कमी के कारण ऐसा कर रहे हैं.”
छत्तीसगढ़ में कोरबा, सरगुजा, धमतरी, जशपुर, सूरजपुर, गौरला पेंड्रा मरवाही में मानव हाथी संघर्षकी घटनाएं आम हैं. इसका कारण कृषि भूमि में वृद्धि, खनन का विस्तार और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कारण हाथी गलियारों का विखंडन है, जिससे जानवरों के पारंपरिक प्रवास पथ बाधित होते हैं. जिसकी वजह से हाथी अक्सर भोजन और पानी की तलाश में गांवों में घुस आते हैं, जिससे स्थानीय आबादी के साथ उनका टकराव होता है।
वन अधिकारियों और वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, अपने सामान्य मार्गों से भटके हाथियों के झुंड अक्सर आक्रामक हो जाते हैं, जिससे संपत्ति को भारी नुकसान होता है और मानव जीवन के लिए खतरा पैदा होता है.


















