रिपोर्ट हरी प्रसाद यादव
शिक्षा का मंदिर कहलाने वाले स्कूल यदि स्वयं ही गंदगी कचरे के ढेर में तब्दील हो जाएं, तो भविष्य के निर्माण की बात कैसे की जा सकती है?
यह सवाल जनपद पंचायत अनूपपुर के ग्राम पंचायत धुरवासिन स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय, कोटमी और शासकीय प्राथमिक विद्यालय अहिरान टोला दोनों स्कूल की बदहाल स्थिति को देखकर उठता है। वह स्कूल जहां से पढ़कर बच्चे आगे बढ़ते हैं आज स्वच्छता के मामले में पीछे छूट गया लगता है
मंदिर जैसा पवित्र स्थान पर नहीं है स्वच्छता का ध्यान स्कूल को शिक्षा का मंदिर कहा जाता है। इसी मंदिर से शिक्षा पाकर छोटे कर्मचारी, बड़े अधिकारी यहां तक कि कद्दावर नेता भी बनते हैं लेकिन इस मामले में, इस मंदिर की दीवारों पर जमी धूल और आंगन में बिखरा कचरा साफ दिखाई दे रहा है स्कूल परिसर में नियमित सफाई, लिपाई-पोताई का अभाव स्पष्ट नजर आता है कूड़े के ढेर और उग आई झाड़ियों ने परिसर की रौनक खराब कर दी है।
बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा पर खतरा गंदगीभरा माहौल न केवल बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है, बल्कि उनके पढ़ाई के अनुकूल वातावरण को भी बाधित करता है। एक स्वच्छ, आकर्षक और साफ-सुथरा स्कूल परिसर बच्चों को सीखने के लिए प्रेरित करता है। इसके विपरीत, यहां की वर्तमान स्थिति बच्चों और अभिभावकों के मन में स्कूल प्रबंधन और शिक्षा व्यवस्था के प्रति उदासीनता का भाव पैदा कर रही है।
स्थानीय अभिभावक और ग्रामीण नाराज
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या की ओर संबंधित अधिकारियों का ध्यान कई बार आकर्षित कराने की कोशिश की, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई। वे चाहते हैं कि जिला प्रशासन और पंचायत विभाग तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करे और स्कूल की नियमित सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित करे। साथ ही, परिसर की मरम्मत और रंगाई-पुताई का काम भी शीघ्र शुरू किया जाए।


















