पाँच भाषाओं में प्रस्तावना पाठ कर दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल ने रचा इतिहास
मनेन्द्रगढ़। क्षेत्र के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल मनेन्द्रगढ़ में संविधान दिवस राष्ट्रीय गर्व और उत्साह के साथ मनाया गया। विशेष प्रार्थना सभा के साथ प्रारंभ हुए इस कार्यक्रम में देशभक्ति की गूंज और संविधान के प्रति सम्मान का अद्भुत समन्वय देखने को मिला।
कार्यक्रम की शुरुआत में छात्र अरनव तिवारी ने संविधान दिवस के महत्त्व पर प्रकाश डाला। इसके बाद कक्षा नवमीं की छात्रा वरीशा ने संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों की जानकारी देते हुए विद्यार्थियों को जागरूक किया। विद्यालय के प्राचार्य डॉ. बसंत कुमार तिवारी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में भारतीय संविधान के निर्माण की ऐतिहासिक यात्रा, इसके निर्माताओं के कठिन परिश्रम तथा संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की दूरदर्शिता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज़ नहीं बल्कि संपूर्ण राष्ट्र के जीवन का मार्गदर्शन करने वाली दर्शनशैली है। उन्होंने विद्यार्थियों को अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों जैसे राष्ट्रप्रेम, अनुशासन, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सौहार्द का पालन करने की प्रेरणा दी। गणित विभाग की वरिष्ठ शिक्षिका सोनल धवन ने भी अपने संबोधन में संविधान के इतिहास, महत्व और मूल्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान हमारे राष्ट्र की आत्मा है जो हमें समानता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुत्व की भावना प्रदान करता है।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा विद्यालयीन छात्र-छात्राओं द्वारा कन्नड, गुजराती, छत्तीसगढ़ी, हिन्दी और अंग्रेजी सहित पाँच भाषाओं में संविधान की प्रस्तावना का पाठ। इस अनोखी प्रस्तुति ने विविधता में एकता की भावना को साकार किया और सभागार में उपस्थित सभी विद्यार्थियों व शिक्षकों के हृदय में गहरी देशभक्ति की भावना जगा दी। समूचे विद्यालय परिसर में संविधान के प्रति सम्मान और निष्ठा की प्रतिध्वनि सुनाई दी। विद्यार्थियों ने संकल्प लिया कि वे संविधान के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाते हुए एक जिम्मेदार नागरिक बनेंगे।कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत के साथ हुआ।


















