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मीरा खदान बंद करने की साजिश का पर्दाफाश संयुक्त यूनियन व सुरक्षा समिति के निरीक्षण में खुलासा—कई वर्षों तक संभव है कोयला उत्पादन निजीकरण से नवभर्ती युवाओं व कर्मचारियों

By Santosh Chaurasiya

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जमुना–कोतमा। जमुना कोतमा क्षेत्र की मीरा भूमिगत खदान को प्रबंधन द्वारा बंद किए जाने की कथित साजिश को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। विगत कुछ दिनों से खदान प्रबंधन द्वारा मीरा खदान को बंद करने की कोशिशों के बीच 07 जनवरी 2026 को संयुक्त यूनियन के आह्वान पर क्षेत्रीय सुरक्षा समिति के सदस्यों ने खदान का विस्तृत निरीक्षण किया। इस निरीक्षण में सभी संगठनों के प्रतिनिधि, खान प्रबंधन, कॉलरी सर्वेयर, क्षेत्रीय सुरक्षा अधिकारी एवं अन्य अधिकारी शामिल रहे।

 

निरीक्षण के प्रथम चरण में खान प्रबंधक कार्यालय में मीरा खदान के तीनों सीम (सीम प्लान) का गहन अवलोकन किया गया। इसके बाद समिति द्वारा खदान के भूमिगत हिस्से का विस्तृत निरीक्षण किया गया। निरीक्षण उपरांत यह निष्कर्ष सामने आया कि खदान में आवश्यक संयंत्र, पर्याप्त मैनपावर तथा बेल्ट प्रणाली मौजूद है और आने वाले कई वर्षों तक लाखों टन कोयले का सुरक्षित उत्पादन किया जा सकता है। इसके बावजूद प्रबंधन खदान को निजी ठेकेदार को सौंपने पर आमादा है।

 

संयुक्त यूनियन का आरोप है कि इस निजीकरण से क्षेत्र के नव-भर्ती युवक, स्थानीय युवा एवं मीरा खदान के वर्तमान कर्मचारियों का भविष्य गंभीर संकट में पड़ जाएगा। निरीक्षण के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि खदानों को इसी तरह निजी हाथों में सौंपा गया, तो आने वाले समय में मजदूरों को जमुना–कोतमा क्षेत्र से अन्य क्षेत्रों में पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

 

इस मौके पर कोयला मजदूर सभा (HMS) के जमुना–कोतमा क्षेत्रीय अध्यक्ष श्रीकांत शुक्ला ने कहा कि वे स्वयं सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन उन्हें क्षेत्र में नई भर्ती होने वाले युवाओं और मजदूरों के भविष्य की गहरी चिंता है। उन्होंने सभी कर्मचारियों से अपील की कि वे संगठित होकर मीरा खदान के निरंतर संचालन के लिए प्रबंधन के खिलाफ एकजुट संघर्ष करें तथा संयुक्त मोर्चा और संयुक्त श्रम संगठनों को मजबूत सहयोग दें।

 

उन्होंने यह भी आह्वान किया कि मीरा खदान के साथ-साथ जमुना यूजीआरओ को पुनः संचालित कराने के लिए सभी मजदूर एकजुट हों, ताकि मजदूर हितों, क्षेत्र और कंपनी के दीर्घकालीन हितों की रक्षा की जा सके।

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