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शीतलहर को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर सीएमएचओ डॉ. अविनाश खरे का निर्देश अस्पतालों में आरक्षित रहें बेड, मशीनें और दवाएं तैयार

By Santosh Chaurasiya

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एमसीबी। जिले में बढ़ती ठंड और संभावित शीतलहर को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे ने सिविल सर्जन जिला अस्पताल एमसीबी, 220 बिस्तरीय अस्पताल मनेन्द्रगढ़ सहित जिले के समस्त सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को स्पष्ट निर्देश दिये हैं कि ठंड से पीड़ित मरीजों के उपचार के लिये पृथक बेड आरक्षित रखे जाएं और उपचार में प्रयुक्त सभी आवश्यक मशीन, उपकरण एवं दवाओं की पूर्व व्यवस्था सुनिश्चित की जाये।

 

*बच्चे, बुजुर्ग और दिव्यांग सर्वाधिक संवेदनशील*

 

सीएमएचओ ने निर्देशित किया है कि शीतलहर के दौरान उच्च जोखिम समूह विशेषकर बच्चे, बुजुर्ग, दिव्यांगजन, हृदय और सांस रोग से पीड़ित व्यक्तियों की विशेष निगरानी और देखभाल की जाये साथ ही मैदानी स्वास्थ्य कर्मियों को आम नागरिकों को शीतलहर के लक्षण, बचाव उपाय एवं Do’s & Don’ts के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिये गये हैं।

 

*दिसंबर–जनवरी में बढ़ता है खतरा*

 

उल्लेखनीय है कि प्रदेश में दिसंबर और जनवरी माह के दौरान शीतलहर का प्रकोप सामान्यतः देखने को मिलता है। कई क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान 5 से 7 डिग्री सेल्सियस या उससे भी नीचे दर्ज किया जाता है जिससे जन-स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। अत्यधिक ठंड के कारण हाइपोथर्मिया, फ्रॉस्टबाइट जैसी शीतजनित बीमारियां तथा गंभीर परिस्थितियों में मृत्यु तक की संभावना बन जाती है।

 

*ये वर्ग सबसे ज्यादा खतरे में*

 

शीतलहर के दौरान विशेष रूप से 65 वर्ष से अधिक आयु के वृद्धजन, 5 वर्ष से कम आयु के बच्चे, हृदय और श्वसन रोगी,

बेघर लोग, खुले स्थानों और निर्माण स्थलों पर कार्यरत श्रमिक, सड़क किनारे रहने वाले व्यक्ति और छोटे व्यवसायी

अत्यधिक संवेदनशील होते हैं।

 

*शीतलहर क्या है*

 

शीतलहर एक मौसम संबंधी स्थिति है जिसमें न्यूनतम तापमान में अचानक गिरावट, तेज ठंडी हवाएं तथा पाला या बर्फ जमने जैसी परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं।

 

*शीतलहर में क्या करें (Do’s)*

 

मौसम की जानकारी रेडियो, टीवी और समाचार पत्रों से लेते रहें। गर्म कपड़े कई परतों में पहनें। सिर, गर्दन, हाथ और पैरों को ढककर रखें। टोपी, मफलर, मोज़े और वॉटरप्रूफ जूतों का प्रयोग करें। गर्म तरल पदार्थ जैसे चाय, सूप लें। संतुलित आहार और विटामिन-सी युक्त फल-सब्जियों का सेवन करें।

ठंडी हवा से बचें, अनावश्यक यात्रा ना करें। बच्चों, बुजुर्गों और अकेले रहने वालों का विशेष ध्यान रखें। आवश्यक दवाइयों, ईंधन और पेयजल का भंडारण रखें। ठंड से प्रभावित होने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।

 

*क्या ना करें (Don’ts)*

 

अत्यधिक ठंड में खुले स्थानों पर अधिक समय ना बिताएं। गीले कपड़े पहनकर ना रहें।

हाइपोथर्मिया से पीड़ित व्यक्ति को शराब ना दें। गंभीर लक्षणों को नजरअंदाज ना करें।

हाइपोथर्मिया व फ्रॉस्टबाइट के लक्षण तेज कंपकंपी, अत्यधिक थकान, भ्रम की स्थिति, बोलने में कठिनाई, अत्यधिक नींद आना,

हाथ-पैर, कान या नाक में सुन्नता

त्वचा का सफेद या पीला पड़ना

शिशुओं में ठंडी, लाल त्वचा और ऊर्जा की कमी

 

*आपात स्थिति में तुरंत उपचार जरूरी*

 

स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि हाइपोथर्मिया एक चिकित्सकीय आपात स्थिति है। ऐसे में पीड़ित व्यक्ति को तुरंत गर्म स्थान पर ले जाकर सूखे कंबल से ढकें और शीघ्र नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं।

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