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बच्चों को अधपेट खाना, अफसरों को कागज़ी संतोष – कटनी में योजना बनी मज़ाक

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बच्चों को अधपेट खाना, अफसरों को कागज़ी संतोष – कटनी में योजना बनी मज़ाक

पीएम पोषण योजना में भारी अनियमितता: गुणवत्ता के नाम पर छलाव

मदन तिवारी

कटनी जिले के रिठी क्षेत्र अंतर्गत आने बाले अधिकांश विद्यालयों में प्रधानमंत्री पोषण योजना (पूर्व में मध्यान्ह भोजन योजना) के क्रियान्वयन में भारी लापरवाही और अनियमितताएं सामने आई हैं। शासन द्वारा दिए गए स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद यहां योजना का संचालन मनमानी तरीके से किया जा रहा है, जिससे न केवल शासन की मंशा को ठेस पहुंच रही है, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है

पीएम पोषण योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों को पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना शासन का प्रमुख उद्देश्य है। इसके लिए खाद्यान्न सामग्री जैसे गेहूं-चावल के साथ-साथ दाल, तेल, नमक, हल्दी, मिर्च, मसाले आदि एगमार्क ब्रांड के सीलबंद पैकेट में उपलब्ध गुणवत्तापूर्ण सामग्री ही उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही डबल फोर्टीफाइड आयोडाइज्ड नमक का प्रयोग अनिवार्य बताया गया है, ताकि बच्चों को पोषण से संबंधित आवश्यक तत्व मिल सकें। खुले मसाले, खुले तेल या घटिया गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग पूर्णत: प्रतिबंधित किया गया है

लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। जिले के विद्यालयों में इन निर्देशों की न तो जानकारी है और न ही पालन किया जा रहा है

समीक्षा के दौरान यह भी सामने आया कि विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति दर्ज करने से पहले ही मध्यान्ह भोजन बनाना प्रारंभ कर दिया जाता है। इसका सीधा मतलब है कि जो भोजन बच्चों की संख्या के अनुसार बनना चाहिए, वह मनमाने ढंग से तैयार किया जा रहा है। इससे दो संभावनाएं बनती हैं — या तो उपस्थित बच्चों को पर्याप्त भोजन नहीं मिल पा रहा या फिर अनुपस्थित बच्चों के नाम पर सामग्री का दुरुपयोग हो रहा है

जिले के जनपद शिक्षा केन्द्रों कटनी, रीठी, विजय राघवगढ़, ढीमर खेडा, बडवारा, बहोरीबंद अंतर्गत अमूमन सभी विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन योजना के तहत भारी गड़बड़ियां पाई गईं। रसोईघर में खुले मसाले, प्लास्टिक की बोतलों में भरा तेल पाए गये। साफ-सफाई का स्तर बेहद खराब था। रसोइया ने बताया कि सामग्री पास की किराना दुकान से मंगवाई जाती है और वह भी जब मन हुआ तब — न कोई गुणवत्ता की जांच, न रसीद, न ब्रांडेड पैक।
शासन द्वारा मध्यान्ह भोजन के लिए हर दिन का विशेष मेनू निर्धारित किया गया है। सप्ताह के प्रत्येक दिन अलग-अलग व्यंजन जैसे खिचड़ी, सब्जी-रोटी, पुलाव, दाल-चावल, हलवा आदि परोसे जाने की व्यवस्था है। लेकिन स्कूलों में जाकर जब वास्तविकता देखी गई तो पाया गया कि सप्ताह भर वही दाल-चावल या खिचड़ी परोसी जा रही है, वो भी बेहद हल्के स्तर की

जिले के अधिकांश बिद्यालायो में बच्चों से बातचीत करने पर पता चला कि उन्हें अधिकतर दिनों में निर्धारित से कम भोजन मिलता है. सब्जी या अन्य पोषक तत्वों की मात्रा न्यूनतम है। इससे स्पष्ट होता है कि बच्चों को संतुलित पोषण नहीं मिल पा रहा

अधिकांश विद्यालयों के रिकॉर्ड में सामग्री की खरीद, बच्चों की उपस्थिति और भोजन की मात्रा सब कुछ व्यवस्थित ढंग से दर्ज है, लेकिन गुरुवार को जनपद शिक्षा केंद्र रीठी अंतर्गत मुख्य सडक पर स्थित ग्राम मुहास माध्यमिक विद्यालय में उपस्थित 80 बच्चों के भोजन बनाने के बर्तन संक्या में कम और छोटे पाए गए. ऐसे में जिस दिन बच्चों की उपस्थिति सत प्रतिशत होती होगी तो उनको पर्याप्त भोजन कैसे मिल पाता होगा । क्या उन्हें आधा पेट ही भोजन दिया जाता होगा,,,? इस छोटे बर्तन में भोजन बनने से डेढ़ सौ बच्चों का पेट केसे भरता होगा,? इसका मतलब है कि कागजों में सब कुछ सही है, लेकिन जमीनी कार्यवाही पूरी तरह अव्यवस्थित और अनियमित है।
कटनी जिले में प्रधान मंत्री पोषण आहार योजना की देखरेख करने वाले अधिकारियों की कार्यशैली पर भी प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। शिक्षा विभाग की ओर से निरीक्षण के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति की जा रही है

अब सवाल यह है कि…क्या जिम्मेदार अधिकारी इस पर संज्ञान लेंगे? जवाब आने वाला समय देगा, लेकिन तब तक बच्चों को असंतुलित और निम्न गुणवत्ता वाला भोजन मिलता रहेगा। यह न केवल सरकारी धन की बर्बादी है, बल्कि भावी पीढ़ी के स्वास्थ्य के साथ एक प्रकार की क्रूर मज़ाक भी है

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