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मुडधोबा में चबूतरा घोटाला  सरपंच मनकुंवारी सिंह और सचिव विमल प्रसाद साहू ने विकास को डकार लिया, इंजीनियर बने भ्रष्टाचार के सहायक

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मुडधोबा में चबूतरा घोटाला  सरपंच मनकुंवारी सिंह और सचिव विमल प्रसाद साहू ने विकास को डकार लिया, इंजीनियर बने भ्रष्टाचार के सहायक

जमुना/कोतमा मुडधोबा। ग्राम पंचायत मुडधोबा में पांचवें राज्य वित्त आयोग की राशि गांव के विकास के लिए आई थी, लेकिन यहां यह रकम ईंट-गारे में नहीं, बल्कि लालच की भट्टी में जलकर राख हो गई सरकारी योजनाओं की रकम गांव की गलियों में घूमने के बजाय सीधे भ्रष्टाचारियों की जेब में उतर गई

 

देवी मढ़िया के पास ₹1,08,000 की लागत से चबूतरा बनना था, लेकिन ₹90,800 ऐसे ही हजम कर लिए गए — बिना एक ईंट रखे, बिना एक गड्ढा खोदे। भवन सिंह के घर के पास ₹99,000 का चबूतरा बनना था, वहां भी ₹74,900 ऐसे उड़ा दिए गए जैसे यह किसी की पुश्तैनी जायदाद हो। दोनों जगह आज भी खाली जमीन और जंगली झाड़ियां हैं, जो इस लूट की मूक गवाह बन चुकी हैं

भ्रष्टाचार का संगठित गिरोह

इस घोटाले का पूरा प्लान सरपंच मनकुंवारी सिंह और सचिव विमल प्रसाद साहू की मेज पर बना। जनता के पैसों को अपनी तिजोरियों में ठूंसने के इस खेल में इंजीनियरों ने भी खुली छूट दे दी। नियम कहता है कि भुगतान तभी होगा जब इंजीनियर काम की जांच और मूल्यांकन करे, लेकिन यहां इंजीनियरों ने आंखों पर भ्रष्टाचार की पट्टी बांध ली

 

सचिव विमल प्रसाद साहू का रवैया तो और भी घिनौना है। गांव का हिसाब-किताब रखने वाला यह व्यक्ति, जो जनता के धन का प्रहरी होना चाहिए था, खुद लुटेरा बन गया। सरपंच मनकुंवारी सिंह के साथ मिलकर इन्होंने विकास के नाम पर गांव की जेब काट ली। दोनों ने रकम ऐसे चट कर ली जैसे भूखे भेड़िए शिकार फाड़ते हैं

 

जनपद की सुस्ती और इंजीनियरों की मिलीभगत

SDO(AE) और उसके अधीन सब इंजीनियर अगर अपने पद की जिम्मेदारी निभाते तो यह घोटाला जन्म ही नहीं लेता। लेकिन यहां तो सबने मौन साध लिया। सब इंजीनियर मौके पर पहुंचे, चाय-नाश्ता किया, और रिपोर्ट में लिख दिया — “काम पूरा।” मानो विकास का मतलब सिर्फ फाइल पर दस्तख़त करना हो

 

गांव में आक्रोश की ज्वाला

ग्रामीण कहते हैं — “ये लोग सिर्फ पैसा नहीं खा रहे, ये हमारे गांव का भविष्य चबा रहे हैं। सरपंच मनकुंवारी सिंह और सचिव विमल प्रसाद साहू ने मुडधोबा के विकास का गला घोंट दिया है। इंजीनियर भी इनके साथ मिल गए, जो जनता के पैसों पर ऐश कर रहे हैं और हमें धूल में छोड़ गए हैं।”

 

कार्रवाई नहीं हुई तो सड़कें जलेंगी

ग्रामीण अब इस घोटाले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनका अल्टीमेटम साफ है — “अगर एक भी आरोपी बचा तो जनपद और जिला मुख्यालय पर तालाबंदी करेंगे, और सड़क पर उतरकर ऐसा आंदोलन करेंगे कि ऊपर तक की कुर्सियां हिल जाएं।”

 

यह घोटाला सिर्फ दो चबूतरों की रकम का नहीं है, बल्कि यह इस सड़ी-गली व्यवस्था का आईना है, जिसमें सरपंच और सचिव अपनी कुर्सी को धन कमाने की मशीन बना लेते हैं, इंजीनियर भ्रष्टाचार के तेल से उस मशीन को चलाते हैं, और जनता के हिस्से में आता है सिर्फ धोखा, धूल और अपमान।

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