‘भाषा प्रौद्योगिकी का भारतीय परिदृश्य’ विषय पर ऑनलाइन व्याख्यान आयोजित
अमरकंटक।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय में 11 दिसंबर 2025 को भारतीय भाषा उत्सव समिति द्वारा महाकवि सुब्रमण्यम भारती की पुण्यतिथि के अवसर पर ‘भाषा प्रौद्योगिकी का भारतीय परिदृश्य’ विषयक ऑनलाइन व्याख्यान का आयोजन आभासी माध्यम से किया गया। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रो. ब्योमकेश त्रिपाठी की अध्यक्षता एवं मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
व्याख्यान में मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. धनजी प्रसाद, प्राध्यापक, भाषाविज्ञान विभाग, केंद्रीय हिंदी संस्थान, नई दिल्ली उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति अध्यक्ष प्रो. रेनू सिंह, अधिष्ठाता, मानविकी एवं भाषा संकाय ने की, जबकि सदस्य-सचिव के रूप में डॉ. अर्चना श्रीवास्तव, हिंदी अधिकारी, राजभाषा प्रकोष्ठ मौजूद रहीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. जयंत कुमार बेहरा, सह-प्राध्यापक (समाजशास्त्र एवं नृविज्ञान विभाग) के संचालन उद्बोधन से हुआ। इसके पश्चात प्रो. रेनू सिंह ने स्वागत भाषण देते हुए प्रभारी कुलपति, मुख्य वक्ता एवं उपस्थित शिक्षकों, अधिकारियों, शोधार्थियों व विद्यार्थियों का अभिनंदन किया।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रभारी कुलपति प्रो. ब्योमकेश त्रिपाठी ने भारतीय भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्धन पर बल देते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत भाषा और तकनीक का समन्वय अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को भारतीय भाषाओं के वैश्वीकरण में सहायक साधन बताते हुए आधारभूत भाषा कार्यों और क्षेत्रीय शोध की महत्ता रेखांकित की।
मुख्य वक्ता प्रो. धनजी प्रसाद ने अपने व्याख्यान में भाषा प्रौद्योगिकी को भाषाविज्ञान और कंप्यूटर विज्ञान के मध्य सेतु बताते हुए इसके विविध अनुप्रयोगों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने मशीनी अनुवाद, ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन, सूचना प्रत्यानयन, पाठ सारांशीकरण, प्रश्नोत्तर प्रणाली, वार्ता प्रणाली, कंप्यूटेशनल कोश, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, TDIL, अनुवादिनी, बहुभाषी अनुवाद सारथी ‘भारती’, लिपिधा, शब्द संधान, ध्वनि परिवर्तक, अनुलेखिका एवं अनुवाचिका जैसी तकनीकी सुविधाओं की उपयोगिता पर जानकारी दी।
समापन सत्र में डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने प्रभारी कुलपति, मुख्य वक्ता, समिति अध्यक्ष, समिति सदस्यों एवं समस्त प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रो. जितेन्द्र कुमार सिंह, प्रो. एम.पी. गौड़, डॉ. मालती लोधी, डॉ. स्नेहा सिंह मुंडा, डॉ. राकेश सोनी, डॉ. प्रवीण कुमार सहित 30 से अधिक शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।


















