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कोल माफिया का काला खेल रामपुर बटूरा खुली खदान में रोड सेल के नाम पर लूट, पांच हजार प्रति ट्रक वसूली!

कोल माफिया का काला खेल रामपुर बटूरा खुली खदान में रोड सेल के नाम पर लूट, पांच हजार प्रति ट्रक वसूली!

कोयला खदानें केवल ऊर्जा का स्रोत नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और माफियागिरी का अड्डा बन चुकी हैं खनन क्षेत्र में यदि ईमानदारी की लौ जलती भी है तो उसे काले धुएं में दबा दिया जाता है एस ए सी एल सोहागपुर एरिया रामपुर बटूरा खुली कोयला खदान (OCM) में इन दिनों एक संगठित लूट का तंत्र चल रहा है जहां रोड सेल के नाम पर पांच हजार प्रति ट्रक की अवैध वसूली की जा रही है यह अवैध कारोबार किसी एक स्तर पर नहीं, बल्कि गेटकीपर से लेकर जीएम तक का हिस्सा तय है

इस काले खेल के पीछे ट्रांसपोर्टर, लोडिंग इंचार्ज, रोड सेल इंचार्ज, कांटा घर के कर्मचारी, मैनेजर और ऊंचे पदों पर बैठे सफेदपोशों का गठजोड़ है ट्रकों को कोयला तभी मिलता है जब मोल-भाव पूरा हो जाता है जो जितना देता है उसे उतनी ही बेहतर गुणवत्ता का कोयला मिलता है और जो नहीं देता उसका रास्ता बंद कर दिया जाता है

एसईसीएल के सोहागपुर एरिया रामपुर बटूरा खुली खदान में
संगठित लूट हैंड लोडिंग से खुली कोयला खदान में खेल
रामपुर खुली खदान में हैंड लोडिंग पूरी तरह प्रतिबंधित है खदानों से निकला कोयला उसी ग्रेड में डीईओ धारकों (Direct E-auction Holders) को मिलना चाहिए, जिसके लिए नीलामी हुई है। लेकिन सच्चाई इससे उलट है

हैंड लोडिंग का खेल

प्रतिबंध के बावजूद टैरेक्स मशीनों से उच्च गुणवत्ता का कोयला चोरी-छिपे निकाला जा रहा है और उसे उन ट्रकों में लोड किया जाता है जो सही कीमत चुकाते हैं इस पूरी प्रक्रिया को रोड सेल इंचार्ज की निगरानी में अंजाम दिया जाता है
गेट पास और ट्रांसपोर्टरों की संदेहास्पद भूमिका
कोयले से लदे ट्रकों का गेट पास और ट्रांसपोर्टरों की बिल्टी पूरी तरह संदेह के घेरे में हैं
रोज़ करोड़ों रुपये का गोरखधंधा चल रहा है लेकिन प्रशासन सब कूल-कूल के अंदाज में आंख मूंदे बैठा है

मजदूरों का शोषण

हैंड लोडिंग में लगे मजदूरों को कोई सुरक्षा बीमा या पीएफ नहीं मिलता
इन्हें ठेकेदारों के भरोसे छोड़ दिया जाता है और कभी भी हादसा हो जाए कोई जिम्मेदारी लेने वाला नहीं
कई बार हैंड लोडिंग करने वालों में झगड़े और हिंसा तक हो जाती है
कोल माफिया का वर्चस्व: ‘जो देगा, वही लेगा

एसईसीएल के सोहागपुर एरिया रामपुर बटूरा खुली खदान में जो देगा वही लेगा की नीति चल रही है कोल माफिया के आगे हर सिस्टम बौना साबित हो रहा है सवाल यह उठता है कि जब इस पूरे खेल की जानकारी स्थानीय प्रशासन पुलिस और खदान प्रबंधन को है तो कार्रवाई क्यों नहीं होती?

सुरक्षा गार्ड केवल वसूली में व्यस्त

ट्रकों की आवाजाही पर नज़र रखने के लिए सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए हैं लेकिन उनकी असली भूमिका प्राइवेट गुंडों की तरह वसूली करवाने की है
जो ट्रक न्यूनतम पांच हजार नहीं देता उसे खदान के अंदर घुसने ही नहीं दिया जाता

प्राइवेट वसूली एजेंटों की तैनाती
खदान के बाहर प्राइवेट लोग बिठाए गए हैं जो सही ट्रक और गलत ट्रक का फैसला करते हैं
जिन ट्रकों से वसूली नहीं हो पाती उन्हें अंदर जाने नहीं दिया जाता

सरकारी मशीनरी की चुप्पी: ‘ऊपर तक खेल फैला हुआ है
रामपुर बटूरा खुली खदान में चल रही अवैध वसूली और कोयला हेराफेरी को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिम्मेदार अधिकारी क्यों चुप हैं?
क्या यह मुमकिन है कि बिना ऊपर की मिलीभगत के यह सब चल सके?
क्या रोड सेल इंचार्ज ट्रांसपोर्टर कांटा बाबू और मैनेजर अकेले यह खेल चला रहे हैं या फिर इसका हिस्सा ‘बड़े साहब भी हैं?

कोल माफिया का साम्राज्य कब तक चलेगा?

अनूपपुर की रामपुर बटूरा खुली खदान का यह घोटाला सिर्फ एक उदाहरण है यह पूरा तंत्र इस बात का सुबूत है कि कोल माफिया का प्रभाव इतना मजबूत है कि सरकारी नियम प्रशासन और कानून इनके सामने बौने साबित हो जाते हैं

हर दिन कोई न कोई ट्रक अवैध रूप से लोड होकर निकलता है हर दिन कोई न कोई मजदूर इस शोषण का शिकार बनता है और हर दिन लाखों-करोड़ों की काली कमाई ‘बड़े अधिकारियों’ की जेब में जाती है

यह मामला केवल कोयला चोरी का नहीं बल्कि एक पूरे तंत्र के भ्रष्टाचार में लिप्त होने का जीता-जागता उदाहरण है

अब देखना यह है कि क्या यह माफिया राज यूं ही चलता रहेगा या फिर कोई इस गोरखधंधे पर रोक लगाएगा?

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