प्यारी क्रमांक-1 में चल रहा अवैध खेल: रॉयल्टी बचाने के चक्कर में ठेकेदार कर रहा नदी का सीना छलनी
फुनगा पुलिस और खनिज विभाग की भूमिका संदिग्ध, ग्रामीणों ने की मशीनें और ट्रैक्टर राजसात करने की मांग
रिपोर्ट – मित्तल महरा
फुनगा/अनूपपुर।
जिले में कानून व्यवस्था का मखौल उड़ाते हुए एक गंभीर मामला सामने आया है। जिस प्रशासन पर अवैध उत्खनन रोकने की जिम्मेदारी है, उसी प्रशासन के नाक के नीचे सरकारी भवन के निर्माण में चोरी की रेत का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। मामला फुनगा क्षेत्र का है, जहाँ गोहरारू नदी को माफियाओं ने चारागाह बना लिया है। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इस अवैध रेत का उपयोग किसी निजी मकान में नहीं, बल्कि प्यारी क्रमांक-1 में बन रहे कस्तूरबा गांधी छात्रावास में किया जा रहा है।
सरकारी पैसे से बन रही इमारत, लेकिन संसाधन ‘चोरी’ के?
खबर है कि प्यारी क्रमांक-1 में निर्माणाधीन कस्तूरबा गांधी छात्रावास के ठेकेदार द्वारा सरकारी राजस्व (रॉयल्टी) की चोरी की जा रही है। नियमानुसार, सरकारी निर्माण कार्यों में वैध खदान की रॉयल्टी वाली रेत लगनी चाहिए, लेकिन मुनाफे के लालच में ठेकेदार गोहरारू नदी के प्यारी, देखल और अमलाई घाटों से रात के अंधेरे में अवैध उत्खनन करवा रहा है। सवाल उठता है कि क्या संबंधित इंजीनियर और अधिकारियों को इस “काले खेल” की जानकारी नहीं है, या सब कुछ मिलीभगत से चल रहा है?
दिनदहाड़े चल रही चोरी, सो रहा सिस्टम
ग्रामीणों के अनुसार, गोहरारू नदी में मशीनें और ट्रैक्टर-ट्रॉली दिन-रात गरज रहे हैं। नदी का प्राकृतिक स्वरूप पूरी तरह नष्ट किया जा रहा है। फुनगा पुलिस की गश्त इन रास्तों पर नदारद रहती है और खनिज विभाग शिकायत के बाद भी मौके पर नहीं पहुँचता। ग्रामीणों का आरोप है कि यह चुप्पी इशारा करती है कि माफियाओं के तार बहुत ऊपर तक जुड़े हैं।
जिम्मेदार अधिकारियों के लिए 3 बड़े सवाल:
कस्तूरबा गांधी छात्रावास के निर्माण में लग रही रेत की रॉयल्टी रसीद (TP) की जांच अब तक क्यों नहीं की गई?
जब प्यारी, देखल और अमलाई में खुलेआम जेसीबी चल रही है, तो खनिज विभाग ने अब तक कोई ट्रैकर जब्त (राजसात) क्यों नहीं की?
सरकारी निर्माण में अवैध सामग्री का उपयोग होने पर निर्माण एजेंसी/ठेकेदार पर FIR कब दर्ज होगी?
कार्रवाई नहीं हुई तो होगा आंदोलन
विशेषज्ञों के मुताबिक, अवैज्ञानिक खनन से गोहरारू नदी के तट कट रहे हैं और जलस्तर रसातल में जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर और एसपी अनूपपुर से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि कस्तूरबा गांधी छात्रावास में लग रही अवैध रेत की जांच कर ठेकेदार और खनन माफियाओं पर FIR दर्ज नहीं की गई, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।


















