दीपावली से पहले कोतमा-भालूमाड़ा क्षेत्र में जुआ खेल का दौर तेज, युवा वर्ग हो रहा बर्बादी की ओर
– रिपोर्ट: संतोष चौरसिया
कोतमा दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही कोतमा, भालूमाड़ा, जमुना और फुनगा थाना क्षेत्र में एक बार फिर “52 पारी” नामक पारंपरिक जुआ खेल का जाल बिछ गया है रात ढलते ही इन इलाकों में पत्तों की खनक और पैसों की खटखटाहट से माहौल गर्म हो जाता है सैकड़ों की संख्या में युवा, मजदूर वर्ग और कुछ व्यापारी भी इस खेल में अपनी किस्मत आजमाने जुट रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक कई गुप्त अड्डे सक्रिय हैं, जहां रातभर जुआ का सिलसिला चलता है। बताया जाता है कि ये अड्डे अक्सर खेतों, सुनसान मकानों, जंगल किनारे या होटल के कमरों में लगाए जाते हैं, जहां सुरक्षा का कोई डर नहीं होता। दीपावली से पहले हर साल की तरह इस बार भी जुआरियों का उत्साह चरम पर है
ग्रामीणों का कहना है कि पहले यह खेल कुछ मित्रों के बीच मनोरंजन के रूप में सीमित था, लेकिन अब यह बड़े पैमाने पर सट्टे के रूप में बदल चुका है। हजारों रुपये दांव पर लगाए जा रहे हैं, और हारने वाले कई युवा कर्ज में डूब रहे हैं। कई परिवार ऐसे हैं जिनके घरों में दीपावली की खुशियां कर्ज और कलह की छाया में गुम हो रही हैं।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कुछ स्थानों पर इस जुआ कारोबार में बाहरी गिरोह भी शामिल हैं जो युवाओं को फंसाकर उनसे कमीशन वसूलते हैं। कई बार विवाद और झगड़े भी सामने आए हैं, परंतु डर और सामाजिक बदनामी के कारण शिकायतें थाने तक नहीं पहुंच पातीं।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह प्रवृत्ति न केवल युवाओं को आर्थिक रूप से तोड़ रही है, बल्कि अपराध की दिशा में भी धकेल रही है। बेरोजगारी और आसान पैसे की लालच में फंसकर कई युवा अब जुए को “किस्मत बदलने” का जरिया मानने लगे हैं।
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि दीपावली से पहले ही इन जुआ अड्डों पर छापामार कार्रवाई की जाए। साथ ही पुलिस गश्त बढ़ाकर ऐसे अवैध खेलों पर नकेल कसी जाए, ताकि आने वाली पीढ़ी को इस बर्बादी के रास्ते से बचाया जा सके।
अगर प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, तो यह “त्योहार का जुआ” धीरे-धीरे “युवाओं की तबाही” का कारण बन सकता है

















