अनूपपुर
अनूपपुर जिले के छतई क्षेत्र में प्रस्तावित 3200 मेगावाट बिजली उत्पादन वाले पावर प्लांट को लेकर ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश है। आरोप है कि अदानी समूह की परियोजना के नाम पर क्षेत्र को विनाश की ओर धकेला जा रहा है। हेवी ब्लास्टिंग, पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी और प्रदूषण के खतरे ने पांच गांवों के हजारों लोगों के जीवन को संकट में डाल दिया है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना स्थल के आसपास लगातार की जा रही हेवी ब्लास्टिंग से घरों की नींव हिल रही है। कई मकानों में दरारें पड़ चुकी हैं, दीवारें कमजोर हो रही हैं और लोग भय के साए में जीने को मजबूर हैं। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं पर इसका सबसे अधिक असर पड़ रहा है। तेज धमाकों से मवेशी बिदक रहे हैं और खेतों की मिट्टी तक प्रभावित हो रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पावर प्लांट चालू होने के बाद जहरीला धुआं, राख और प्रदूषण पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लेगा। सांस संबंधी बीमारियां, त्वचा रोग और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। लोगों का कहना है कि यह इलाका पहले से ही संवेदनशील है, ऐसे में इतना बड़ा थर्मल पावर प्लांट यहां के पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए घातक साबित होगा।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि शासन–प्रशासन की भूमिका आखिर क्या है? ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार शिकायतों और ज्ञापनों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही। न तो ब्लास्टिंग की तीव्रता पर नियंत्रण है और न ही पर्यावरणीय मानकों की सख्त निगरानी। प्रशासनिक चुप्पी ने लोगों के आक्रोश को और भड़का दिया है।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यह केवल विकास का मुद्दा नहीं, बल्कि हजारों लोगों के अस्तित्व का सवाल है। यदि समय रहते अदानी समूह की इस परियोजना की निष्पक्ष जांच नहीं हुई और जनहित को प्राथमिकता नहीं दी गई, तो छतई और आसपास के गांवों में हालात और भयावह हो सकते हैं।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी आवाज़ को अनसुना किया गया, तो वे उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन कब जागता है और क्या छतई के लोगों को इस कथित विनाशकारी परियोजना से राहत मिल पाती है या नहीं।


















