एमसीबी। जिला मुख्यालय मनेन्द्रगढ़ से लगभग 110 किलोमीटर दूर जनकपुर के समीप स्थित कैलाशपुर धाम में मकर संक्रांति पर्व के अवसर पर प्रतिवर्ष विशाल मेले का आयोजन होता है। यह धाम प्राचीन शिवलिंग के लिये प्रसिद्ध है और स्थानीय श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। स्थानीय जनों के अनुसार कैलाशपुर धाम में रियासत काल से ही पूजा-अर्चना की परंपरा चली आ रही है। कहा जाता है कि राजा भैया महावीर के समय से यहां नियमित धार्मिक अनुष्ठान होते रहे हैं।
इतिहासकार डॉ. विनोद पांडेय के अनुसार वर्ष 1939 में तत्कालीन स्टेट सुपरिंटेंडेंट सूर्य प्रसाद पांडेय, सेठ दुलीचंद, अनिंतया अहरिन, आर. एम. टाटा और करतार चंद के सहयोग से इस स्थल को मंदिर का विधिवत स्वरूप प्रदान किया गया। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां भगवान शिव की पूजा अर्चना के लिए पहुंचते हैं। इस दौरान 5 से 6 दिनों तक चलने वाला विशाल मेला आयोजित किया जाता है। मेले में पूजा-पाठ की सामग्रियों के साथ-साथ मीना बाजार, झूले, खिलौनों और विभिन्न प्रकार की दुकानों की रौनक रहती है जो मंदिर परिसर की शोभा को और बढ़ा देती है।
भारी भीड़ को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के मद्देनज़र अनुविभागीय अधिकारी राजस्व द्वारा मेला स्थल में आंशिक परिवर्तन किया गया है ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना या अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। मेले के दौरान स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल पूरी तरह सतर्क और सक्रिय रहता है। कैलाशपुर धाम ना केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी क्षेत्र का महत्वपूर्ण आस्था केंद्र बना हुआ है।








