खंडहर से जंगल की ओर लौटा परिवार: आमाडांड में 30 दिन बाद मादा भालू दो शावकों संग रवाना
रिपोर्टर: शशिधर अग्रवाल
अनूपपुर। अनूपपुर जिले के कोतमा वन परिक्षेत्र अंतर्गत आमाडांड गांव में पिछले एक माह से चर्चा का विषय बनी मादा भालू आखिरकार अपने दो शावकों के साथ जंगल की ओर लौट गई। जानकारी के अनुसार, आमाडांड पंचायत भवन के पीछे स्थित गोकुल पनिका के खंडहर घर में मादा भालू ने करीब 9 जनवरी को दो शावकों को जन्म दिया था। इसके बाद वह लगभग 30 दिनों तक उसी खंडहर में रहकर बच्चों की सतत देखरेख करती रही।
वन विभाग के अनुसार, शावकों की आंखें खुलने और कुछ बड़े होने के बाद मादा भालू उन्हें रात के समय खंडहर से बाहर निकालकर आसपास घुमाती देखी गई। शुक्रवार–शनिवार की मध्य रात्रि मादा भालू अपने दोनों शावकों को लेकर आमाडांड से लगे मलगा के जंगल की ओर चली गई।
परिक्षेत्र सहायक मलगा राजमणि सिंह एवं मलगा बीट के वनरक्षक दादूराम कुशवाहा सुरक्षाकर्मियों के साथ पूरे समय निगरानी में जुटे रहे। मादा भालू के खंडहर में ठहरने की सूचना मिलते ही वन अमले ने एहतियात बरतते हुए उसे समय-समय पर बेर, बीही एवं अन्य आहार उपलब्ध कराया, ताकि वह सुरक्षित रहे और किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।
उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पूर्व रात के समय खंडहर के पीछे मादा भालू को शावकों के साथ घूमते ग्रामीणों ने देखा था। इसी दौरान पास जाने पर एक ग्रामीण के घायल होने की भी सूचना मिली, जिससे बस्ती में भय का माहौल बन गया था। अब मादा भालू के बच्चों सहित जंगल लौट जाने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है और क्षेत्र में स्थिति सामान्य हो गई है।









