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शहडोल  शहडोल जिले का ऐसा प्राथमिक विद्यालय जहां डेढ़ महीने से बच्चों को नहीं मिल रहा मध्यान भोजन। प्रभारी प्रधानाध्यापक श्रद्धा पाठक को नहीं पता तिरंगे में कितने रंग होते हैं।  बच्चों के भविष्य के साथ हो रहा खिलवाड़। इसी प्राथमिक विद्यालय में हुआ राष्ट्रीय त्यौहार का अपमान, नहीं फहराया गया 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के दिन तिरंगा।

By Santosh Chaurasiya

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शहडोल

 

शहडोल जिले का ऐसा प्राथमिक विद्यालय जहां डेढ़ महीने से बच्चों को नहीं मिल रहा मध्यान भोजन।

 

प्रभारी प्रधानाध्यापक श्रद्धा पाठक को नहीं पता तिरंगे में कितने रंग होते हैं।

 

बच्चों के भविष्य के साथ हो रहा खिलवाड़।

 

इसी प्राथमिक विद्यालय में हुआ राष्ट्रीय त्यौहार का अपमान, नहीं फहराया गया 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के दिन तिरंगा।

 

शासकीय वॉर्ड नं 06 प्राथमिक विद्यालय में नहीं किया गया ध्वजारोहण। नाही बच्चों को मिष्ठान वितरण किया गया ना ही विशेष भोज दिया गया जबकि

राष्ट्रीय त्यौहार में मिष्ठान और विशेष भोज प्रदान करने का प्रावधान है विशेष बात यह कि इस शासकीय प्राथमिक विद्यालय में ज्यादातर बच्चे दिव्यांग हैं।

प्राथमिक शिक्षक एवं प्रभारी प्रधानाध्यापक श्रद्धा पाठक का मनमानी पूर्ण रवैया।

 

जब पत्रकार अरुण द्विवेदी के द्वारा पूछा गया कि ध्वजारोहण हुआ है तो उसकी फोटो वीडियो या कोई ऐसा साक्ष्य जो सामने रहा हो उसका नाम बताइए या दिखाइए पर प्रभारी प्रधानाध्यापक श्रद्धा पाठक के द्वारा बताया गया कि जब मैंने ध्वजारोहण किया तो उस समय कोई उपस्थित नहीं था।

फिर पत्रकार साथी के द्वारा पूछा गया कि अगर ध्वजारोहण हुआ है तो राष्ट्र ध्वस्त स्कूल में होगा फिर श्रद्धा पाठक के द्वारा बताया गया कि राष्ट्रध्वज चोरी हो गया है,

प्रभारी प्रधानाध्यापक श्रद्धा पाठक के द्वारा बताई गई सभी जानकारी झूठी और मिथ्या साबित हो रही है जिससे यह स्पष्ट होता है कि प्राथमिक शिक्षक श्रद्धा पाठक के द्वारा राष्ट्र दिवस का अपमान किया गया साथ ही साथ जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता भी सामने आई है की इतनी बड़ी लापरवाही शहडोल जिला मुख्यालय के हृदय स्थल कहे जाने वाले वार्ड नंबर 9 में हुई जिसके पार्षद नगर पालिका परिषद शहडोल के अध्यक्ष स्वयं है ऐसे वार्ड में ऐसी लापरवाही होना बड़ी बात है।

 

शहडोल ज़िले के वरिष्ठ अधिकारी क्या आंखों में पट्टी बांध के बैठे हैं।

क्या कोई मॉनिटरिंग नहीं की जाती उच्च अधिकारियों के द्वारा।

अभिवावकों की एवं स्थानीय लोगों की माने तो प्राथमिक शिक्षक श्रद्धा पाठक मानसिक रूप से विक्षिप्त हैं।

 

इसके पहले भी श्रद्धा पाठक के द्वारा बच्चों को, अभिवावकों को और सह कर्मियों को गाली गलौज करने की शिकायत की जा चुकी है।

फ़िर भी संबंधित अधिकारी ऐसी शिक्षिका पर क्यों मेहरबान हैं, ये तो जांच का विषय है।

 

प्रश्न यह उठता है कि क्या सच में ज़िले के अधिकारियों ने एक पागल और अनपढ़ के हाथों बच्चों का भविष्य सौंप दिया है।

 

ऐसे शिक्षकों पर उचित कार्यवाही कर प्रशाशन को सबक सिखाना चाहिए और इनकी मानसिक जांच करा कर बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने की आवश्यकता है।

 

 

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