सहकारी समिति बनी ‘निजी जागीर’, प्रबंधक की तानाशाही से अन्नदाता त्रस्त”
प्यारी-1 में ‘अंधेर नगरी’ जैसे हालात: प्रबंधक सैयद नाफिश अहमद के अहंक़ार की भेंट चढ़ी किसान अमित महरा की मेहनत, धान खरीदने से साफ इंकार
सरकार किसानों को ‘अन्नदाता’ कहती है, लेकिन ग्राम पंचायत प्यारी क्रमांक-1 की सहकारी समिति में जो हो रहा है, वह किसी ‘तानाशाही’ से कम नहीं है। समिति प्रबंधक सैयद नाफिश अहमद ने अपने पद को ‘सेवा’ के बजाय ‘सत्ता’ का केंद्र बना लिया है। आलम यह है कि नियमों को ताक पर रखकर किसान अमित महरा का धान खरीदने से साफ मना किया जा रहा है।
अहंकार के आगे नतमस्तक सिस्टम
सवाल यह है कि आखिर प्रबंधक सैयद नाफिश अहमद को इतना संरक्षण किसका प्राप्त है? एक किसान, जो खून-पसीना एक कर फसल उगाता है, जब अपनी ही उपज बेचने समिति पहुंचता है, तो उसे बैरंग लौटा दिया जाता है। बताया जा रहा है कि बिना किसी वैध कारण के अमित महरा की धान को रिजेक्ट किया जा रहा है, जो सीधे तौर पर एक अधिकारी की निरंकुशता को दर्शाता है।
किसान ने भी ठानी: “न्याय नहीं तो उठाव नहीं”
प्रबंधक की इस हठधर्मिता के खिलाफ किसान अमित महरा ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी धान की खरीदी सम्मानजनक और पारदर्शी तरीके से नहीं होती, वे धान का उठाव (लिफ्टिंग) नहीं होने देंगे। यह सिर्फ एक किसान की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के खिलाफ लड़ाई बन गई है।
सवाल जो चुभेंगे:
क्या सहकारी समिति प्रबंधक सैयद नाफिश अहमद शासन के नियमों से ऊपर हैं?
किसान अमित महरा की धान में ऐसी कौन सी कमी है जो सिर्फ प्रबंधक को दिख रही है, लेकिन नियमों में नहीं?
क्या प्रशासन किसान की फसल सड़ने का इंतजार कर रहा है?
जन आक्रोश
क्षेत्र के किसानों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। दबी जुबान में लोग कह रहे हैं कि समिति में वही होता है जो प्रबंधक चाहते हैं, नियम-कायदे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। यदि जिला प्रशासन ने समय रहते इस मामले में हस्तक्षेप नहीं किया और दोषी प्रबंधक पर कार्रवाई नहीं की, तो यह मामला बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।


















